Saturday, September 26, 2009

सवाल..............





मेरी चाह मे तो कमी रही,
तेरी आँख मैं क्योँ नमी रही,

ता उम्र मैं रहा बदनाम तेरे नाम से,
तेरी खलुष मे फिर क्यूँ कमी रही,

तेरे तशव्वूर मे मेरा ख्याल भी नही,
तेरी याद मेरी जीस्त की दायामी रही,

तुमसे गले लगे सद्दियाँ गुजर गई,
तेरी जुल्फ मे आज कैसी बरहमी रही,

तुम्हारी ज़िन्दगी मे बहुत मुमकिन है खुशियाँ हो,
हमारी ज़िन्दगी मे खैर वही मातमी रही,







खलुष- खुशी

जीस्त- ज़िन्दगी,

बरहमी- उलझा हुआ






1 comment:

  1. achi rachna ..........
    sabhdo ka behtarin isteymaal
    or likhye humari subh kamnaye aapke saath....

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