मैं तुम्हारे साथ एक नामालूम सफर पर हूँ,
लब खामोश और सब खामोश हैं,
मगर बोल रही हमारी निगाहें,
जिसने आज तक कुर्बत नही देखी,
तुम मेरी बाँहों मैं सिमट रही हो,
मेरी रूह तुममे पिघल रही है,
की तभी एक आहट सी होती है,
और तुम चौंक जाती हो,
की अचानक याद आता है की,
हम तनहा नही है,
सही है अक्सर होश ही ,
तन्हाई लाती है....................हम बेहोश ही कितने अच्छे थे जान
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