
कंपकपाता मैं पथिक,
और तुम अलाव हो मेरा,
चिलचिलाती धुप सर पे,
और तुम छाँव हो मेरा,
मैं शहर की कशमकश,
और तुम गाँव हो मेरा,
जीवन मेरी एक अल्हड नदी,
और तुम नाव हो मेरा,
जाने कबसे चल रहा,
अब तुम पडाव हो मेरा,
और तुम अलाव हो मेरा,
चिलचिलाती धुप सर पे,
और तुम छाँव हो मेरा,
मैं शहर की कशमकश,
और तुम गाँव हो मेरा,
जीवन मेरी एक अल्हड नदी,
और तुम नाव हो मेरा,
जाने कबसे चल रहा,
अब तुम पडाव हो मेरा,
मैं तो था ठहरा सा पानी
और तुम हो बहाव मेरा.
umda rachna likhte rehne .
ReplyDeleteyeh jivit rehne ki anubhuti hai.......
satya .
one of the best pem... keep up writing :))
ReplyDeleteits very nice writing.
ReplyDeletesubtle, but very expressive. well written.
ReplyDeleteye bhi abhisapt swapn se inspired hai..........
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