Sunday, September 20, 2009

एहसास...





जगह वो अब भी है मेरे जेहन में,
जहा गुजरे थे वक्त तेरे प्यार में,

परी चेहरा जो कभी था हमारा,
अब वो भी नही हमारे इख्तियार में,

जहाँ से मुड गई थी अपनी राहें,
वहीँ खड़ा मैं तेरे इंतज़ार में,

ना तू, ना वक्त,ना दुनिया, ना मिजाज,
बचा कुछ भी नही मेरे आबशार में,

बहुत भटका हूँ,जुस्तजू में तेरी,
निशाँ पाँव के मिलेंगे कू -ए- यार में,


आबशार- आँख
जुस्तजू- तलाश





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