Friday, October 2, 2009

नाकाम कोशिश........



देख ली सारी कोशिशे करके,
कोई तो तौर बता,तुझको भूल जाने का,

थोड़ा खून बेचते है,थोड़ी खुशी,
ये मेरा सलीका,ज़िन्दगी बिताने का,

तेरी याद,तेरी जुस्तजू, तेरी तमन्ना,
ये लाल-ओ-गुहार मेरे खजाने का,

मिट चुके होते शायद कभी के,
अगर न होता इंतज़ार तेरे आने का,

लाल-ओ-गुहार -हीरा-मोती

2 comments:

  1. nice..keep working on it... get better
    Ved

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  2. Gud poem...urdu to gazab ki h...
    keep penning ur emotions...

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