Sunday, November 8, 2009

फिर नाकामी...........

तेरी गलियों से फिर नाकाम लौटा,
जैसे बिन मिले जरुरी पैगाम लौटा,

तेरी दीद को तरसती आबशार लेकर,
फिर तेरे दर से बदनाम लौटा,

कोई पूछने वाला न दिख सका मुझको,
की तुमको दिल में लिए गुमनाम लौटा,

सुबह से ही खाक छानी तेरी यादों की,
घर से निकला तो शर - ऐ-शाम लौटा,

कई दिन हुए खुदा को याद किए हुए,
जब याद आई तो मेरा अजान लौटा,

7 comments:

  1. चाहतें ऐसे ही दिन दिखाती हैं .

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  2. Bahut hi khubsurat panktya.................dil ko choo gai.

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  3. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढ़े और टिप्पणी करें

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  4. बस ठीक ही है झूठी तारीफ नहीं करना चाहता माफ करियेगा

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