Sunday, November 8, 2009

तेरे शहर से कुछ लेकर लौटा हूँ.........

तेरे शहर से कुछ लेकर लौटा हूँ,

कुछ पुरानी यादें, अधूरे वादे,
कुछ उलझे सवाल, तेरा ख्याल,

तूझे कभी न पाने की कसक,
तेरे हाँथों की नई मेहँदी की महक,

कुछ जगहों पे तेरे कदमो का अहसास,
मेरे लबो पे तेरे होंटों की मिठास,

मेरे दिल की तरह टूटा, अँगूठी का टुकड़ा,
लाखो गम छुपाये तेरा मुस्कुराता मुखड़ा,

दूर से हाथ हिलाता तेरा धुँधला सा अक्स,
बेपलक ताकता मेरे भीतर का वो शख्स,

सबकुछ हाँ सभी ले आया हूँ,
जानती हो इस दफा खाली हाँथ नहीं लौटा,

















3 comments:

  1. bahut sundar..
    bahar me rahne ki koshis karen
    kafi upar jane ki adamy yogyata hai apme.

    satya vyas

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  2. Yaar kavaita likha hai ya...line se line ki wordings ko milaya hai...kuch taal-mel nahi baithta...ekdum roadside type...

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