Sunday, June 13, 2010

मगर शायद

किस तरह तुमने मुझे भुलाया होगा,
ये सलीका भी हमने तुम्हे सिखाया होगा,

कभी तो दस्तक दी होगी याद ने मेरे,
कभी मेरे  अक्स ने तुम्हे रुलाया तो होगा,

एक उम्र रतजगे में काटी है हमने,
तुम्हे चांदनी ने थपकियों से सुलाया तो होगा,

एक अरसा गुजारी इसी आसरे में,
कभी हमारा प्यार याद  आया तो होगा,

2 comments:

  1. एक उम्र रतजगे में काटी है हमने,
    तुम्हे चांदनी ने थपकियों से सुलाया तो होगा,

    बहुत खूब ....!!

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  2. बहुत दिन हुए आपका कुछ पढने को नहीं मिला

    मेरे ब्लॉग पर मेरी नयी कविता संघर्ष

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