तेरे मेरे बीच की चाहत,
एक हकीकत थी या कोई ख्वाब,
ये रिश्ता भी खुदा -शाज था,
या फिर बनाया था हमने सोचकर,
जिस राह पे तेरा हाथ थामे,
मैं चला था सबकुछ छोड़कर,
उसकी कोई मंजिल थी,
या फिर यूँ ही समय की बर्बादी,
तुमसे मिली जो कोमल खुशियाँ,
उसपर करू विश्वास या न करू कोई आस,
जो खवाब तेरे साथ देखे,
क्या कभी पुरे होंगे या टूटेंगे हमेशा की तरह,
क्या समझू मैं............
Friday, January 8, 2010
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i am always there 4 u,,,whenever u need me..
ReplyDeleteआपका प्यार और स्नेह मुझे अभिभूत कर गया
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