होंटों के कम्पन में
ह्रदय के क्रंदन मे,
अवर्निये कष्ट मे,
घोर अनिष्ट मे,
आत्मंवेसर्ण मे,
अकक सम्प्रेसंर्ण मे,
मलिंतायो से निकलते हुए,
अग्निपथ पे चलते हुए,
अगणित रतजगो में,
तुम ही तो साथ होते थे.....
Saturday, February 20, 2010
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