शाम है, तन्हाई को गले लगाना है,
जाने मेरे घर में अभी, किस किस को आना है,
क्या मुसीबत है जान हम दोनों के लिए,
बिन मिले एक दूसरे से मिलके आना है,
उम्र सारी तेरी चाहत के नाम कर देते,
मगर कुछ लम्हें तो अपने लिए बचाना है,
राह काँटों भरी मेरी है लेकिन,
इस राह से ही आपको भी घर जाना है,
Friday, December 25, 2009
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