शाम है, तन्हाई को गले लगाना है,
जाने मेरे घर में अभी, किस किस को आना है,
क्या मुसीबत है जान हम दोनों के लिए,
बिन मिले एक दूसरे से मिलके आना है,
उम्र सारी तेरी चाहत के नाम कर देते,
मगर कुछ लम्हें तो अपने लिए बचाना है,
राह काँटों भरी मेरी है लेकिन,
इस राह से ही आपको भी घर जाना है,
Friday, December 25, 2009
Sunday, December 20, 2009
मुझमे कुछ.................
मुझमे कुछ मर गया है शायद,
वो अपना काम कर गया है शायद,
गर्द-ओ-गुबार बैठने लगे है फिर,
वक़्त हँस के गुजर गया है शायद,
चले तो दोनों साथ ही थे,
वो किसी मरहले पर ठहर गया है शायद,
आज ख़त कोरा ही वापस आया,
खौफ-ए-रुसवाई से डर गया है शायद,
सुना है उसने फिर किया है याद मुझको,
एक और "दिल" से जी भर गया है शायद,
वो अपना काम कर गया है शायद,
गर्द-ओ-गुबार बैठने लगे है फिर,
वक़्त हँस के गुजर गया है शायद,
चले तो दोनों साथ ही थे,
वो किसी मरहले पर ठहर गया है शायद,
आज ख़त कोरा ही वापस आया,
खौफ-ए-रुसवाई से डर गया है शायद,
सुना है उसने फिर किया है याद मुझको,
एक और "दिल" से जी भर गया है शायद,
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