Sunday, November 8, 2009

फिर नाकामी...........

तेरी गलियों से फिर नाकाम लौटा,
जैसे बिन मिले जरुरी पैगाम लौटा,

तेरी दीद को तरसती आबशार लेकर,
फिर तेरे दर से बदनाम लौटा,

कोई पूछने वाला न दिख सका मुझको,
की तुमको दिल में लिए गुमनाम लौटा,

सुबह से ही खाक छानी तेरी यादों की,
घर से निकला तो शर - ऐ-शाम लौटा,

कई दिन हुए खुदा को याद किए हुए,
जब याद आई तो मेरा अजान लौटा,

तेरे शहर से कुछ लेकर लौटा हूँ.........

तेरे शहर से कुछ लेकर लौटा हूँ,

कुछ पुरानी यादें, अधूरे वादे,
कुछ उलझे सवाल, तेरा ख्याल,

तूझे कभी न पाने की कसक,
तेरे हाँथों की नई मेहँदी की महक,

कुछ जगहों पे तेरे कदमो का अहसास,
मेरे लबो पे तेरे होंटों की मिठास,

मेरे दिल की तरह टूटा, अँगूठी का टुकड़ा,
लाखो गम छुपाये तेरा मुस्कुराता मुखड़ा,

दूर से हाथ हिलाता तेरा धुँधला सा अक्स,
बेपलक ताकता मेरे भीतर का वो शख्स,

सबकुछ हाँ सभी ले आया हूँ,
जानती हो इस दफा खाली हाँथ नहीं लौटा,