Friday, October 9, 2009

खलिश...

एक उम्र बसर सर-ए- राह की हमने,
तेरे बगैर यूँ भी निबाह की हमने,

वो हँस रहे हैं देख कर धार-ए-नश्तर,
भेज लानत की अगर एक आह की हमने,

उसी समय से आवारगी की बाम चढ़े,
कि जिस दिन से तेरी चाह की हमने,

कोई साथी नही मेरे शब्-ए-तन्हाई का,
कि आंसुओं से तेरे बाद निकाह कि हमने,

Saturday, October 3, 2009

कुछ ऐसे ही....

कभी तेरे बात की खुशी,
कभी तेरे साथ की खुशी,

अब तू खुश है कहीं.......मुझे इस बात की खुशी,

Friday, October 2, 2009

नाकाम कोशिश........



देख ली सारी कोशिशे करके,
कोई तो तौर बता,तुझको भूल जाने का,

थोड़ा खून बेचते है,थोड़ी खुशी,
ये मेरा सलीका,ज़िन्दगी बिताने का,

तेरी याद,तेरी जुस्तजू, तेरी तमन्ना,
ये लाल-ओ-गुहार मेरे खजाने का,

मिट चुके होते शायद कभी के,
अगर न होता इंतज़ार तेरे आने का,

लाल-ओ-गुहार -हीरा-मोती