Tuesday, April 27, 2010

एक रुकी हुई रात...

घंटो शायद पहरों,
एक रुकी हुई रात,
हर रोज  आती है,
हर रोज एक ही बात्तें,
एक जैसी चीजे हर रोज,
ऑफिस, ऑटो, फ़ोन,मैं,
सड़क की चीजे,जाने क्या-क्या,

 एक ही तरह के सवाल,
और उनका एक ही जवाब,
कुछ नयापन तलाशने की,
न कोई आस न कभी प्रयास,
अनगिनत पल एक जैसे ही,

और इन पलो में बीतता मैं,
हर लम्हा तुम्हारी याद के साथ,
आज भी तुम्हारे इंतज़ार में,
इसी रुकी हुई रात की तरह,
ठहरा हुआ, वहीँ पड़ा हुआ,

मैं तुम्हारे इंतजार में.....

Sunday, April 4, 2010

दिल ने जब.....

दिल ने जब भी धोखा खाया है,
सच कहूँ तू बहुत याद आया है,

सच है हार गया मैं मोहब्बत की जंग,
मगर कुछ देर के लिए तेरा साथ तो पाया है,

तुम खुश हो कहीं और मेरे बगैर भी,
दूर होकर भी ये सौगात मैंने पाया है,

बात तेरी लाचारियो की नहीं,बेवफाई की है,
खैर जाते जाते भी प्यार तुने सिखाया है,

चाहे हँसते हुए लब हो या अश्कबार आँखें,
हर शै में दर्द तेरा ही छुपाया है,